मानसून के मौसम में पिछेती गन्ने की फसल तेजी से बढ़ती है, लेकिन इसी समय कई फफूंदजनित और कीटजनित रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। यदि समय रहते इन रोगों की पहचान और उचित प्रबंधन नहीं किया जाए, तो फसल की वृद्धि, गन्ने की मोटाई और अंतिम उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए किसान इस समय नियमित रूप से अपने खेत का निरीक्षण करते रहें और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं।
इस समय किन रोगों का सबसे अधिक खतरा रहता है?
बरसात के दौरान खेत में अधिक नमी और तापमान बढ़ने से कई रोग तेजी से फैल सकते हैं। विशेष रूप से पिछेती गन्ने में निम्न रोगों पर नजर रखना जरूरी है।
- पोक्का बोइंग (Pokkah Boeng) रोग
- लाल सड़न (Red Rot)
- स्मट (कंडुआ) रोग
- रस्ट (भूरा रतुआ) रोग
इन रोगों की समय पर पहचान होने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पोक्का बोइंग रोग की पहचान
पोक्का बोइंग गन्ने की एक प्रमुख फफूंदजनित बीमारी है। इसमें नई पत्तियों पर सफेद या पीले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। बाद में पत्तियां मुड़ सकती हैं, फट सकती हैं और पौधे की बढ़वार प्रभावित होती है। अधिक नमी और लगातार बारिश के दौरान यह रोग तेजी से फैल सकता है।
यदि खेत में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो प्रभावित पौधों पर विशेष निगरानी रखें और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अनुशंसित फफूंदनाशी का प्रयोग करें।
लाल सड़न और स्मट रोग से कैसे बचें?
लाल सड़न गन्ने की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक मानी जाती है। प्रभावित गन्ने को बीच से काटने पर अंदर का भाग लाल दिखाई देता है और उसमें सफेद धारियां भी नजर आ सकती हैं। वहीं स्मट रोग में पौधे के ऊपरी हिस्से से काले चाबुक जैसी संरचना निकलती है।
संक्रमित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट करना चाहिए ताकि रोग अन्य पौधों तक न फैले। रोगमुक्त बीज का उपयोग और खेत की नियमित निगरानी भी बचाव के लिए जरूरी है।
कीटों पर भी रखें नजर
रोगों के साथ-साथ कुछ कीट भी इस समय गन्ने को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- तना छेदक (Shoot Borer)
- टॉप बोरर (Top Borer)
- पायरिला
- सफेद ऊनी माहू (Woolly Aphid)
इन कीटों के प्रकोप की स्थिति में कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का ही उपयोग करें और आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
फसल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
बारिश के मौसम में खेत में पानी का लंबे समय तक ठहराव नहीं होने देना चाहिए। जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने से कई रोगों का खतरा कम हो जाता है। साथ ही संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई और नियमित खेत निरीक्षण से फसल मजबूत रहती है।
- खेत में जलभराव न होने दें।
- संक्रमित पौधों को तुरंत हटाकर नष्ट करें।
- केवल अनुशंसित दवाओं का ही प्रयोग करें।
- सप्ताह में कम से कम एक बार पूरे खेत का निरीक्षण करें।
पिछेती गन्ने की फसल में अगस्त का महीना रोग और कीट प्रबंधन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है। पोक्का बोइंग, लाल सड़न, स्मट और रस्ट जैसे रोगों के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर समय पर नियंत्रण करना जरूरी है। साथ ही तना छेदक और अन्य कीटों की नियमित निगरानी भी करें। सही समय पर उचित प्रबंधन अपनाने से फसल स्वस्थ रहेगी और उत्पादन पर किसी बड़े नुकसान की संभावना काफी कम हो जाएगी।




