किसानों और कृषि से जुड़े कारोबार के लिए वित्त की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम यानी NCDC की योजनाएं सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि से जुड़े संस्थानों के लिए वित्तीय मदद का रास्ता खोलती हैं। यहां सबसे जरूरी बात यह है कि NCDC आम तौर पर हर किसान को सीधे व्यक्तिगत लोन या अनुदान नहीं देता। इसकी सहायता मुख्य रूप से पात्र सहकारी समितियों और संबंधित संस्थागत ढांचे के जरिए दी जाती है।
NCDC क्या है और किसानों को इससे कैसे फायदा मिलता है
NCDC एक सरकारी वैधानिक निगम है, जिसका काम सहकारी क्षेत्र के जरिए कृषि उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन, डेयरी, मत्स्य पालन, पशुपालन और दूसरी गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसकी सहायता से छोटे और सीमांत किसानों को भी फायदा मिल सकता है, लेकिन कई मामलों में पैसा सीधे किसान के खाते में नहीं बल्कि पात्र सहकारी संस्था या संगठन को दिया जाता है।
NCDC की सहायता में टर्म लोन, निवेश ऋण, कार्यशील पूंजी और कुछ योजनाओं के तहत सब्सिडी शामिल हो सकती है। सब्सिडी हर परियोजना के लिए तय नहीं होती और इसकी उपलब्धता संबंधित सरकारी योजना तथा पात्रता पर निर्भर करती है।
किसान को सीधे लोन क्यों नहीं मिलता
NCDC की व्यवस्था को समझना यहां सबसे जरूरी है। अगर कोई किसान अकेले अपनी खेती के लिए सामान्य कृषि ऋण चाहता है, तो NCDC को सीधे व्यक्तिगत किसान लोन की तरह समझना सही नहीं है।
NCDC मुख्य रूप से सहकारी संस्थाओं के संस्थागत विकास के लिए वित्त देता है। उदाहरण के लिए PACS, सहकारी समितियां, सहकारी संघ और पात्र FPO जैसी संस्थाएं अपनी कृषि, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन या दूसरी स्वीकृत गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता मांग सकती हैं।
इसका मतलब यह है कि किसान किसी पात्र सहकारी संस्था या FPO से जुड़कर योजना का फायदा अप्रत्यक्ष रूप से पा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी सहकारी संस्था को भंडारण, कृषि प्रसंस्करण या विपणन के लिए वित्त मिलने पर उसके सदस्य किसानों को अपनी उपज रखने या बेचने की बेहतर सुविधा मिल सकती है।
NCDC से किस तरह की सहायता मिल सकती है
NCDC की योजनाओं में सहायता गतिविधि के अनुसार बदलती है। कृषि और उससे जुड़े कारोबार के लिए कार्यशील पूंजी, बुनियादी ढांचा, प्रसंस्करण और भंडारण जैसी जरूरतों के लिए वित्त उपलब्ध कराया जा सकता है।
| सहायता का प्रकार | इसका उपयोग |
|---|---|
| कार्यशील पूंजी ऋण | कृषि कारोबार और रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतें |
| सावधि ऋण | गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, मशीनरी और दूसरी संपत्तियां |
| निवेश ऋण | कृषि प्रसंस्करण और परियोजनाओं का विकास |
| सब्सिडी | पात्र सरकारी योजना के तहत निर्धारित गतिविधियों में |
| परियोजना रिपोर्ट सहायता | कुछ मामलों में परियोजना रिपोर्ट या व्यवहार्यता अध्ययन के लिए |
NCDC के अनुसार अलग-अलग गतिविधियों में सहायता का पैटर्न अलग होता है। कुछ मामलों में सहायता का बड़ा हिस्सा ऋण के रूप में होता है, जबकि पात्र योजनाओं में सरकारी सब्सिडी भी जुड़ सकती है।
सब्सिडी कैसे मिलेगी
यह समझना जरूरी है कि NCDC की हर वित्तीय सहायता में सब्सिडी शामिल नहीं होती। कई परियोजनाओं में NCDC अपना ऋण देता है और सब्सिडी किसी पात्र सरकारी योजना से उपलब्ध होने पर जोड़ी जाती है।
NCDC की मौजूदा जानकारी के अनुसार सब्सिडी संबंधित सरकारी योजना के तहत पात्रता और उपलब्ध राशि पर निर्भर करती है। यदि किसी परियोजना के लिए सब्सिडी उपलब्ध नहीं है, तो सहायता का संबंधित हिस्सा ऋण के रूप में हो सकता है।
इसलिए किसान या सहकारी संस्था को आवेदन करने से पहले यह पता करना चाहिए कि जिस काम के लिए पैसा चाहिए, उसके लिए कौन सी NCDC योजना लागू होती है और क्या उस परियोजना में सब्सिडी का प्रावधान है।
आवेदन कैसे किया जाता है
NCDC के अनुसार पात्र सहकारी संस्थाएं राज्य सरकार के माध्यम से या सीधे NCDC से संपर्क कर सकती हैं। परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट और निर्धारित आवेदन प्रारूप के साथ प्रस्ताव जमा किया जाता है। इसके बाद प्रस्ताव की जांच की जाती है और जरूरत पड़ने पर स्थल का मूल्यांकन भी किया जा सकता है।
आवेदन की प्रक्रिया को आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हैं:
- पहले यह तय करें कि परियोजना NCDC की किस वित्तीय योजना के तहत आती है।
- परियोजना की लागत, काम और वित्त की जरूरत बताने वाली रिपोर्ट तैयार करें।
- निर्धारित ऋण आवेदन पत्र और जरूरी दस्तावेज जमा करें।
- जांच और स्वीकृति के बाद नियमों के अनुसार ऋण की राशि जारी की जाती है।
NCDC की वेबसाइट पर गतिविधि और ऋण के प्रकार के अनुसार सामान्य ऋण आवेदन पत्र उपलब्ध है।
किन कामों के लिए सहायता मिल सकती है
NCDC कृषि से जुड़े कई क्षेत्रों को वित्तीय सहायता देता है। इनमें कृषि विपणन, भंडारण, कोल्ड चेन, कृषि प्रसंस्करण, डेयरी, पशुधन, मत्स्य पालन और FPO से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। (NCDC)
उदाहरण के तौर पर किसान सहकारी संस्था के माध्यम से ऐसी परियोजना का हिस्सा बन सकते हैं जिसमें उनकी उपज का संग्रह, भंडारण, प्रसंस्करण या बाजार तक पहुंच मजबूत की जा रही हो। इससे किसान को केवल खेती करने के बजाय अपनी उपज के कारोबार में भी बेहतर अवसर मिल सकता है।
लोन की अवधि और ब्याज कितना होगा
लोन की अवधि हर योजना और परियोजना के अनुसार अलग हो सकती है। NCDC की मौजूदा जानकारी के अनुसार परियोजनाओं के लिए सावधि ऋण की अवधि सामान्य तौर पर 8 साल तक हो सकती है। मार्जिन मनी और कार्यशील पूंजी के लिए अलग अवधि लागू होती है। ब्याज दर भी समय-समय पर NCDC द्वारा तय की जाती है।
इसलिए किसी एक निश्चित ब्याज दर को सभी NCDC योजनाओं पर लागू मानना सही नहीं होगा। आवेदन से पहले संबंधित योजना की वर्तमान ब्याज दर और पुनर्भुगतान शर्तें जरूर जांचनी चाहिए।
किसान और सहकारी संस्था को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
NCDC की सहायता को मुफ्त पैसा समझना सही नहीं है। जहां ऋण दिया जाता है, वहां उसे तय शर्तों के अनुसार वापस करना होता है। सब्सिडी केवल पात्र योजना और स्वीकृत गतिविधि के अनुसार मिलती है।
किसी भी परियोजना में आगे बढ़ने से पहले उसकी लागत, अपनी हिस्सेदारी, ऋण की वापसी और संभावित आमदनी का हिसाब लगाना जरूरी है। साथ ही आवेदन केवल निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के जरिए करना चाहिए।
आधिकारिक जानकारी और आवेदन
NCDC की मौजूदा वेबसाइट पर योजनाओं, वित्तीय सहायता के तरीके और सामान्य ऋण आवेदन की जानकारी उपलब्ध है। पात्र सहकारी संस्थाएं आवेदन प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी वहीं से देख सकती हैं।
NCDC से किसानों को मिलने वाली सहायता को सीधे व्यक्तिगत किसान सब्सिडी या सामान्य किसान लोन के रूप में नहीं समझना चाहिए। NCDC की मुख्य व्यवस्था सहकारी समितियों, FPO और दूसरे पात्र संगठनों के जरिए कृषि तथा उससे जुड़े कारोबार को वित्त देने की है।
अगर किसान किसी सहकारी समिति या FPO से जुड़े हैं, तो वे उसके माध्यम से कृषि प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन, डेयरी, मत्स्य पालन या दूसरी पात्र परियोजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। वहीं पात्र संस्था निर्धारित आवेदन प्रक्रिया के तहत NCDC से ऋण और, जहां नियमों में प्रावधान हो, सरकारी सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकती है।
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