अल नीनो की स्थिति बनने पर मानसून के कमजोर या अनियमित रहने का खतरा बढ़ सकता है, जिसका असर खेती पर पड़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 के मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना बताई है। ऐसे मौसम में किसानों के लिए पहले से पानी, फसल और मिट्टी की योजना बनाना बेहद जरूरी हो जाता है।
कृषि वैज्ञानिकों की हाल की सलाह में कम पानी में टिकने वाली फसलों, छोटी अवधि वाली किस्मों, पानी बचाने और समय पर बुवाई जैसी रणनीतियों पर जोर दिया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर इलाके में एक ही फसल या तरीका अपनाया जाए। खेत और स्थानीय मौसम के हिसाब से फैसला करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
अल नीनो से खेती को क्या खतरा हो सकता है
अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाला बदलाव है, जिसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है। भारत में इसका संबंध मानसून के व्यवहार से जोड़ा जाता है। 2026 के लिए IMD ने मई में बताया था कि उस समय ENSO की स्थिति सामान्य से अल नीनो की ओर बढ़ रही थी और मानसून के दौरान अल नीनो विकसित होने का अनुमान था।
अगर बारिश कम या असमान होती है, तो खेत में मिट्टी की नमी घट सकती है। इसका असर खासकर उन फसलों पर अधिक पड़ सकता है जिनकी सिंचाई पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। बुवाई में देरी, फसल की बढ़वार पर असर और पानी की कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
हालांकि, अल नीनो का असर हर राज्य और हर जिले में एक जैसा नहीं होता। इसलिए किसानों को केवल सामान्य खबर के आधार पर खेती का फैसला नहीं करना चाहिए। स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है।
कम बारिश की स्थिति में फसल का चुनाव कैसे करें
अगर आपके क्षेत्र में बारिश कम होने की आशंका है और सिंचाई की सुविधा सीमित है, तो ऐसी फसलों और किस्मों पर विचार करना उपयोगी हो सकता है जो कम पानी की स्थिति को बेहतर तरीके से सहन कर सकें। ICAR की हाल की किसान जागरूकता गतिविधियों में भी सूखे या नमी की कमी वाली स्थिति में दलहन, तिलहन और श्री अन्न जैसी फसलों को विकल्प के रूप में बताया गया है।
छोटी अवधि में तैयार होने वाली और स्थानीय मौसम के अनुकूल किस्मों का चुनाव भी जोखिम कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन बीज की किस्म का चुनाव राज्य, मिट्टी, पानी और बुवाई के समय के अनुसार करना चाहिए।
इसलिए बुवाई से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग की फसलवार सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
खेत में पानी बचाने के लिए क्या करें
कम बारिश की स्थिति में खेत की मिट्टी में मौजूद नमी को बचाना बहुत जरूरी है। मिट्टी खुली रहने पर गर्मी और हवा के कारण पानी तेजी से उड़ सकता है। खेत में उपलब्ध फसल अवशेषों का सही इस्तेमाल मिट्टी की नमी बचाने में मदद कर सकता है।
ICAR और कृषि मौसम सलाह में भी मिट्टी में फसल अवशेष मिलाने और उन्हें मल्च के रूप में इस्तेमाल करने जैसी तकनीकों पर जोर दिया गया है। मल्च यानी मिट्टी की सतह को फसल अवशेष जैसी सामग्री से ढकना, जिससे मिट्टी से पानी का नुकसान कम हो सके।
किसान इन उपायों पर ध्यान दे सकते हैं:
- खेत की मिट्टी में नमी बचाने के लिए फसल अवशेषों और उपयुक्त मल्च का इस्तेमाल करें।
- उपलब्ध सिंचाई के पानी का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से करें और अनावश्यक सिंचाई से बचें।
- बारिश होने पर पानी को खेत में रोकने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जल संरक्षण के उपाय अपनाएं।
- बुवाई और सिंचाई का फैसला स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखकर करें।
बुवाई का समय सोच-समझकर तय करें
कमजोर या अनियमित मानसून में बहुत जल्दी या बहुत देर से बुवाई करना नुकसान बढ़ा सकता है। इसलिए किसान को केवल कैलेंडर की तारीख देखकर बुवाई करने के बजाय मिट्टी में पर्याप्त नमी और स्थानीय बारिश की स्थिति को देखना चाहिए।
ICAR की हाल की सलाह में समय पर फसल स्थापित करने और जरूरत पड़ने पर आकस्मिक फसल योजना तैयार रखने पर जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर सामान्य फसल के लिए मौसम अनुकूल न रहे तो किसान के पास दूसरा विकल्प पहले से मौजूद हो।
अगर किसी इलाके में बारिश बहुत कम हो रही हो, तो बिना सिंचाई वाली जमीन पर अधिक पानी मांगने वाली फसल लगाने का जोखिम बढ़ सकता है। दूसरी ओर, जिन किसानों के पास भरोसेमंद सिंचाई सुविधा है, वे स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार अपनी सामान्य फसल जारी रख सकते हैं।
मिट्टी और खाद का भी रखें ध्यान
पानी की कमी के समय पौधों को हर चीज जरूरत से ज्यादा देने से फायदा नहीं होता। खाद का इस्तेमाल मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के अनुसार करना बेहतर है। ICAR ने 2026 की किसान जागरूकता गतिविधियों में भी मिट्टी की जांच और संतुलित खाद प्रबंधन पर जोर दिया है।
खासकर यूरिया या दूसरी खाद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। सही मात्रा में पोषक तत्व देने से खर्च नियंत्रित रखने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
खेत में जैविक पदार्थ बढ़ाने, हरी खाद और फसल अवशेषों का सही इस्तेमाल भी लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है। ICAR ने धैचा जैसी हरी खाद वाली फसल को मिट्टी में मिलाने के लाभ भी बताए हैं।
मौसम की जानकारी किसान के लिए क्यों जरूरी है
अल नीनो जैसी बड़ी मौसमी स्थिति के आधार पर पूरे सीजन की खेती का फैसला करना पर्याप्त नहीं है। किसान के लिए अगले कुछ दिनों और हफ्तों का स्थानीय मौसम ज्यादा काम का होता है।
IMD ने 2026 में किसानों के लिए स्थान आधारित मौसम और कृषि सलाह देने वाली डिजिटल व्यवस्था शुरू की है। इसमें स्थानीय मौसम के आधार पर बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन से जुड़े फैसलों में मदद मिल सकती है।
किसान को खास तौर पर बारिश, तापमान और तेज हवा से जुड़ी स्थानीय चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। अगर मौसम में बदलाव का अनुमान हो, तो सिंचाई, छिड़काव और दूसरी गतिविधियों का समय उसी के अनुसार बदलना बेहतर हो सकता है।
सिर्फ फसल नहीं, पूरी खेती की योजना बनाएं
अगर बारिश कमजोर रहने का खतरा है, तो किसान को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आय के दूसरे रास्तों पर भी विचार करना चाहिए। हाल की ICAR सलाह में एकीकृत खेती, पशुपालन, चारा उत्पादन और दूसरे सहायक कामों को जलवायु जोखिम कम करने के उपायों के रूप में बढ़ावा दिया गया है।
इसका फायदा यह है कि अगर किसी एक फसल को मौसम से नुकसान होता है, तो किसान के पास आय का दूसरा साधन हो सकता है। हालांकि, पशुपालन या कोई नया काम शुरू करने से पहले उसकी लागत, चारे की उपलब्धता और बाजार को समझना जरूरी है।
फसल बीमा और सरकारी सलाह को नजरअंदाज न करें
मौसम से जुड़ा जोखिम बढ़ने पर किसान को अपने क्षेत्र में लागू फसल बीमा और दूसरी सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी भी रखनी चाहिए। ICAR की हालिया क्षेत्रीय तैयारियों में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में जागरूक करने और मौसम आधारित कृषि सलाह को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
किसी योजना का लाभ अपने आप नहीं मिलता। किसान को संबंधित योजना की पात्रता, समय सीमा और जरूरी प्रक्रिया पहले समझनी चाहिए। अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से स्थानीय जानकारी लेना सबसे बेहतर तरीका रहेगा।
अल नीनो के खतरे से किसानों को बचाने का सबसे अच्छा तरीका पहले से तैयारी करना है। कम पानी में टिकने वाली और छोटी अवधि वाली फसलों का सही चुनाव, समय पर बुवाई, मिट्टी की नमी बचाना, संतुलित खाद का इस्तेमाल और स्थानीय मौसम की जानकारी खेती का जोखिम कम कर सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि पूरे देश के लिए एक ही खेती की रणनीति सही नहीं हो सकती। किसान को अपने जिले की बारिश, मिट्टी, सिंचाई की सुविधा और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर फैसला लेना चाहिए। 2026 में अल नीनो की संभावित स्थिति को देखते हुए खेत में नुकसान होने का इंतजार करने के बजाय पहले से आकस्मिक फसल और पानी की योजना तैयार रखना ज्यादा समझदारी होगी।
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