धान में 2-3 फुट तक की घास से परेशान किसान! सही समय पर डालें ये खरपतवार नाशक, जानिए पूरा तरीका

धान की फसल में खरपतवार समय पर नियंत्रित न किए जाएं तो वे पौधों के साथ पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए मुकाबला करते हैं। खासकर जब खेत में घास तेजी से बढ़कर 2 से 3 फुट तक पहुंच जाए, तब किसान के लिए उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

ऐसी स्थिति में केवल कोई एक “सभी खरपतवार खत्म करने वाली दवा” डाल देना सही तरीका नहीं है। खरपतवार किस प्रकार का है, उसकी अवस्था क्या है और धान की फसल कितनी बड़ी हो चुकी है, इन बातों के आधार पर ही सही खरपतवार नाशक का चुनाव किया जाता है।

धान में खरपतवार इतनी बड़ी समस्या क्यों बन जाते हैं?

धान के खेत में सांवा, मोथा, दूब और चौड़ी पत्ती वाले कई प्रकार के खरपतवार दिखाई दे सकते हैं। हर खरपतवार पर एक ही दवा समान असर नहीं करती।

शुरुआत में छोटे खरपतवारों को नियंत्रित करना आम तौर पर आसान होता है। लेकिन अगर किसान लंबे समय तक खेत की निगरानी नहीं करता और खरपतवार बहुत बड़े हो जाते हैं, तो नियंत्रण मुश्किल हो सकता है।

बड़े खरपतवार फसल से पानी और पोषक तत्व लेते हैं। इससे खेत में धान के पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और खेती की लागत भी बढ़ सकती है।

2 से 3 फुट की घास होने पर क्या करें?

अगर खरपतवार पहले ही बहुत बड़ा हो चुका है, तो बिना पहचान किए कोई भी खरपतवार नाशक डालना ठीक नहीं है। पहले यह पता करना जरूरी है कि खेत में कौन-सा खरपतवार ज्यादा है।

कुछ खरपतवारों पर post-emergence यानी खरपतवार निकलने के बाद इस्तेमाल होने वाली दवाएं प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता खरपतवार की उम्र और अवस्था पर निर्भर करती है।

अगर खरपतवार बहुत ज्यादा बड़ा हो चुका है, तो केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय उपलब्ध कृषि सलाह के अनुसार यांत्रिक या हाथ से नियंत्रण जैसे तरीकों पर भी विचार किया जा सकता है।

धान में कौन-कौन से खरपतवार मिलते हैं?

धान के खेत में खरपतवारों को मोटे तौर पर तीन समूहों में समझा जा सकता है। इनकी पहचान सही दवा चुनने में मदद करती है।

  • घास वर्ग के खरपतवार, जैसे सांवा और दूसरी घास।
  • मोथा वर्ग के खरपतवार, जिनकी पत्तियां और जड़ें घास से अलग होती हैं।
  • चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार, जिनकी पत्तियां अपेक्षाकृत चौड़ी होती हैं।

एक ही खेत में इन तीनों प्रकार के खरपतवार एक साथ भी मिल सकते हैं। इसलिए दवा खरीदने से पहले खेत में मौजूद खरपतवार की पहचान करना जरूरी है।

क्या एक दवा सभी खरपतवार खत्म कर सकती है?

नहीं, हर स्थिति में ऐसा नहीं होता। अलग-अलग खरपतवारों के लिए अलग-अलग सक्रिय तत्व काम करते हैं और कुछ herbicides यानी खरपतवार नाशक चुनिंदा खरपतवारों पर ही असर करते हैं।

इसी वजह से “एक दवा डालें और खेत के सभी खरपतवार खत्म” जैसे दावे पर सीधे भरोसा नहीं करना चाहिए। खासकर बड़ी हो चुकी घास पर दवा का असर उसकी उम्र, मौसम और सही मात्रा पर भी निर्भर कर सकता है।

स्थितिक्या ध्यान रखें
छोटे खरपतवारसही समय पर post-emergence विकल्प प्रभावी हो सकते हैं
घास वर्गघास के लिए स्वीकृत खरपतवार नाशक चुनें
मोथामोथा के लिए प्रभावी विकल्प की जरूरत हो सकती है
चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारअलग herbicide की जरूरत हो सकती है
बहुत बड़ी घासकेवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ सलाह लें

खरपतवार नाशक डालते समय सबसे बड़ी गलती न करें

किसान अक्सर सोचते हैं कि अगर थोड़ी ज्यादा दवा डालेंगे तो खरपतवार जल्दी खत्म हो जाएंगे। ऐसा करना सही नहीं है। निर्धारित मात्रा से अधिक दवा डालने से धान की फसल को नुकसान हो सकता है।

इसी तरह दो या तीन खरपतवार नाशकों को अपने हिसाब से मिलाकर छिड़काव करना भी जोखिम भरा हो सकता है। हर product का label और crop recommendation अलग हो सकता है।

दवा का इस्तेमाल हमेशा उस product के लेबल पर लिखी फसल, खरपतवार और मात्रा के अनुसार करें। अगर खेत में खरपतवार बहुत बड़े हैं या उनकी पहचान नहीं हो रही है, तो स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

सही समय पर नियंत्रण क्यों जरूरी है?

खरपतवार नियंत्रण में समय बहुत महत्वपूर्ण है। जब खरपतवार छोटे होते हैं, तब उन्हें नियंत्रित करना आम तौर पर ज्यादा आसान होता है। जैसे-जैसे वे बड़े होते जाते हैं, वे मजबूत होते जाते हैं और कुछ दवाओं का असर कम हो सकता है।

इसलिए किसान को धान की रोपाई या बुवाई के बाद खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए। खरपतवार दिखाई देने पर उनकी पहचान करके समय पर उचित उपाय करना ज्यादा बेहतर है।

धान को नुकसान से बचाने के लिए क्या करें?

खरपतवार नियंत्रण का लक्ष्य केवल खेत को पूरी तरह खाली करना नहीं होना चाहिए। मकसद यह है कि खरपतवार धान की फसल के साथ इतना मुकाबला न कर पाएं कि उत्पादन और पौधों की बढ़वार प्रभावित हो।

सही herbicide चुनने के साथ पानी का प्रबंधन, खेत की निगरानी और जरूरत के अनुसार हाथ से या यांत्रिक निराई जैसे तरीकों को भी अपनाया जा सकता है।

अगर किसी दवा के इस्तेमाल को लेकर थोड़ी भी शंका है, तो product की label instructions जरूर पढ़ें। अलग-अलग धान की varieties और खेती के तरीकों में सलाह अलग हो सकती है।

धान में 2 से 3 फुट तक की घास खड़ी हो जाने के बाद खरपतवार नियंत्रण आसान नहीं रहता। इसलिए “सभी खरपतवार खत्म करने वाली एक दवा” खोजने के बजाय पहले खेत में मौजूद खरपतवार की सही पहचान करना जरूरी है।

छोटे खरपतवारों को सही समय पर नियंत्रित करना ज्यादा प्रभावी तरीका हो सकता है। वहीं बहुत बड़ी घास के मामले में केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर सही तरीका अपनाना बेहतर है।

किसान बिना पहचान के कोई भी खरपतवार नाशक न डालें और निर्धारित मात्रा से ज्यादा दवा इस्तेमाल करने से बचें। सही खरपतवार की पहचान, सही दवा और सही समय ही धान की फसल को सुरक्षित रखने में सबसे ज्यादा मदद करता है।

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