गन्ने की फसल में रेड रॉट यानी लाल सड़न रोग किसानों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस बीमारी में गन्ने के अंदर का हिस्सा लाल पड़ने लगता है और धीरे-धीरे पौधे की सेहत खराब होती जाती है। समय पर पहचान और खेत की सही देखभाल से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की कृषि सलाह में भी गन्ने में रेड रॉट से बचाव के लिए खेत में पानी जमा न होने देने और संक्रमित पौधों को निकालकर नष्ट करने पर जोर दिया गया है। इसलिए बारिश के मौसम में किसानों को गन्ने के खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
रेड रॉट बीमारी क्या है और गन्ने में कैसे पहचानें
रेड रॉट गन्ने की एक फफूंद से होने वाली बीमारी है। इसका असर पौधे के अंदर के तने पर दिखाई देता है। बाहर से कई बार पौधा सामान्य दिख सकता है, इसलिए केवल पत्तियों को देखकर बीमारी की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
बीमारी बढ़ने पर गन्ने की पत्तियां मुरझाने लग सकती हैं और पौधे की सामान्य बढ़वार प्रभावित होती है। संक्रमित गन्ने को लंबाई में काटने पर अंदर के हिस्से में लाल रंग के धब्बे या लाल सड़न दिखाई दे सकती है। इसी वजह से इसे रेड रॉट यानी लाल सड़न कहा जाता है।
बारिश के मौसम में क्यों बढ़ सकती है परेशानी
गन्ने के खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहना फसल के लिए नुकसानदायक है। ज्यादा नमी बीमारी की स्थिति को खराब कर सकती है। इसलिए बारिश के समय खेत से अतिरिक्त पानी निकालना बहुत जरूरी है।
अगर खेत में पानी निकलने की सही व्यवस्था नहीं है तो किसान को जल निकासी पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। खेत में पानी जमा रहने देने के बजाय नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी बाहर निकालना बेहतर है।
इन लक्षणों को देखते ही किसान हो जाएं सावधान
रेड रॉट की शुरुआती पहचान किसान के लिए बहुत जरूरी है। खेत में कुछ पौधे बाकी पौधों की तुलना में कमजोर, मुरझाए या असामान्य दिखाई दें तो उन्हें ध्यान से देखना चाहिए।
गन्ने के पौधे को देखकर और जरूरत पड़ने पर तने को काटकर अंदर का हिस्सा जांचा जा सकता है। अगर अंदर लाल सड़न जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो प्रभावित पौधे को खेत के बाकी पौधों से अलग करना जरूरी है।
बचाव के लिए किसान क्या करें
रेड रॉट से निपटने में केवल बीमारी दिखाई देने के बाद दवा का इस्तेमाल करना ही जरूरी कदम नहीं है। खेत की साफ-सफाई, स्वस्थ बीज गन्ने का चुनाव और पानी की सही निकासी जैसे उपाय बीमारी का दबाव कम करने में महत्वपूर्ण हैं।
- खेत में बारिश का पानी जमा न होने दें और अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था रखें
- बीमारी से प्रभावित पौधों को खेत से निकालकर अलग करें
- रोपाई के लिए स्वस्थ और भरोसेमंद गन्ने का बीज इस्तेमाल करें
- एक ही गन्ने की किस्म पर लंबे समय तक निर्भर रहने के बजाय स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार बेहतर किस्मों का चुनाव करें
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भी रेड रॉट प्रभावित पौधों को निकालने और खेत में पानी जमा होने से रोकने की सलाह दी है। बीमारी वाले खेत में संक्रमित पौधों को छोड़ देना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे रोग का दबाव बढ़ सकता है।
स्वस्थ बीज गन्ने का चुनाव क्यों जरूरी है
गन्ने की अगली फसल की शुरुआत ही स्वस्थ रोपण सामग्री से होती है। अगर किसान पहले से संक्रमित गन्ने का इस्तेमाल रोपाई के लिए करता है तो बीमारी खेत में पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए बीज के लिए ऐसे गन्ने का चुनाव करना चाहिए जो स्वस्थ और बीमारी के लक्षणों से मुक्त हो। किसी क्षेत्र में रेड रॉट की समस्या ज्यादा हो तो वहां की कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपयुक्त और रोग के प्रति बेहतर सहनशील किस्म का चुनाव करना चाहिए।
खेत में संक्रमित पौधा मिले तो क्या करें
अगर कुछ पौधों में रेड रॉट के लक्षण दिखाई दें तो उन्हें सामान्य पौधों के बीच छोड़ना सही नहीं है। प्रभावित पौधों को निकालकर खेत से बाहर करना चाहिए। इससे संक्रमित पौधों के संपर्क और बीमारी के फैलाव का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
निकाले गए संक्रमित पौधों को खेत में ही छोड़ने के बजाय सुरक्षित तरीके से नष्ट करना चाहिए। साथ ही जिस जगह पर संक्रमित पौधा था, वहां की स्थिति पर भी नजर रखनी चाहिए।
किसान को बिना बीमारी की सही पहचान किए किसी भी रसायन का मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर लक्षण स्पष्ट नहीं हैं तो नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से जांच और नियंत्रण की सलाह लेना बेहतर है।
पानी की निकासी पर दें सबसे ज्यादा ध्यान
गन्ने की फसल में बारिश के दौरान जल निकासी की अनदेखी करना भारी पड़ सकता है। खेत में पानी जमा होने से पौधों की जड़ों पर भी दबाव पड़ता है और बीमारी के लिए अनुकूल स्थिति बन सकती है।
खेत की नालियों को पहले से साफ रखना चाहिए ताकि तेज बारिश के बाद पानी जल्दी बाहर निकल सके। जहां पानी रुकने की समस्या बार-बार होती है, वहां खेती की शुरुआत से ही जल निकासी की योजना बनाना ज्यादा अच्छा रहता है।
रेड रॉट से बचाव में जरूरी काम
| काम | किसान को क्या करना चाहिए |
|---|---|
| खेत की निगरानी | नियमित रूप से पौधों की हालत देखें |
| पानी की निकासी | खेत में पानी जमा न होने दें |
| संक्रमित पौधे | पहचान होने पर निकालकर अलग करें |
| बीज गन्ना | स्वस्थ और बीमारी से मुक्त रोपण सामग्री लें |
| बीमारी की पहचान | संदेह होने पर कृषि विशेषज्ञ से जांच कराएं |
| किस्म का चुनाव | स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार उपयुक्त किस्म चुनें |
बीमारी दिखे तो पूरी फसल को नजरअंदाज न करें
रेड रॉट का कोई एक ऐसा उपाय नहीं है जिसे हर खेत में बिना जांच के लागू कर दिया जाए। बीमारी की स्थिति, गन्ने की किस्म और खेत की परिस्थितियों के अनुसार प्रबंधन का तरीका अलग हो सकता है।
इसलिए किसान को एक-दो पौधों में लक्षण दिखने पर पूरी फसल की जांच करनी चाहिए। शुरुआती स्तर पर प्रभावित पौधों को पहचानकर हटाना और खेत में पानी की सही निकासी बनाए रखना सबसे जरूरी कदमों में शामिल है।
गन्ने में रेड रॉट बीमारी को हल्के में लेना किसान के लिए नुकसान का कारण बन सकता है। खासकर बारिश के मौसम में खेत में पानी जमा होने से बचाना और पौधों की नियमित जांच करना जरूरी है।
अगर गन्ने के पौधे मुरझाते दिखाई दें या तने के अंदर लाल सड़न जैसे लक्षण मिलें तो प्रभावित पौधों को तुरंत अलग करना चाहिए। स्वस्थ बीज गन्ने का इस्तेमाल, खेत की साफ-सफाई और सही जल निकासी के साथ समय पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेने से रेड रॉट के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।



