पॉलीहाउस खेती किसानों के लिए कम जमीन में ज्यादा मूल्य वाली फसल उगाने का एक अच्छा तरीका बन रही है। सरकार भी संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए MIDH और National Horticulture Board के जरिए आर्थिक सहायता देती है।
लेकिन ₹1 करोड़ की सब्सिडी का मतलब यह नहीं है कि हर किसान को सीधे ₹1 करोड़ मिलेंगे। बड़ी सब्सिडी मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक हॉर्टिकल्चर प्रोजेक्ट के लिए निर्धारित नियमों के तहत मिल सकती है। 2025 की संशोधित MIDH गाइडलाइन में संरक्षित खेती के प्रोजेक्ट के लिए अधिकतम सब्सिडी ₹100 लाख यानी ₹1 करोड़ तक रखी गई है।
₹1 करोड़ तक की सब्सिडी का असली नियम क्या है
पॉलीहाउस के लिए केंद्र सरकार की सहायता मुख्य रूप से Mission for Integrated Development of Horticulture यानी MIDH के तहत आती है। बड़े प्रोजेक्ट के लिए National Horticulture Board यानी NHB की योजना भी महत्वपूर्ण है।
NHB की 2025 गाइडलाइन के अनुसार protected cultivation को project mode में सहायता दी जा सकती है। इसके लिए प्रोजेक्ट का क्षेत्र सामान्य राज्यों में 2,500 वर्ग मीटर से अधिक होना चाहिए। इस श्रेणी में योग्य प्रोजेक्ट लागत पर 50 प्रतिशत तक credit-linked subsidy का प्रावधान है और अधिकतम सब्सिडी ₹100 लाख यानी ₹1 करोड़ प्रति प्रोजेक्ट है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किसी योग्य प्रोजेक्ट की स्वीकृत लागत ₹2 करोड़ तक है, तो नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत तक सहायता ₹1 करोड़ तक पहुंच सकती है। लेकिन वास्तविक सब्सिडी स्वीकृत लागत, लागू cost norms, प्रोजेक्ट की जांच और बाकी शर्तों पर निर्भर करेगी।
| बात | 2026 में लागू मुख्य जानकारी |
|---|---|
| मुख्य योजना | MIDH |
| बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट | NHB के माध्यम से सहायता संभव |
| संरक्षित खेती | Polyhouse, greenhouse और अन्य protected structures |
| सामान्य क्षेत्र में project-mode न्यूनतम क्षेत्र | 2,500 वर्ग मीटर से अधिक |
| सहायता | योग्य लागत का 50 प्रतिशत तक |
| अधिकतम सहायता | ₹100 लाख यानी ₹1 करोड़ प्रति प्रोजेक्ट |
| सब्सिडी का तरीका | Credit-linked, back-ended subsidy |
| अंतिम राशि | स्वीकृत प्रोजेक्ट और लागू नियमों के अनुसार |
पॉलीहाउस पर कितनी सब्सिडी मिल सकती है
हर पॉलीहाउस के लिए ₹1 करोड़ की सब्सिडी नहीं मिलती। यह सबसे जरूरी बात है जिसे किसान को आवेदन करने से पहले समझना चाहिए।
MIDH की 2025 गाइडलाइन में सामान्य protected cultivation structures के लिए अलग-अलग लागत मानक तय किए गए हैं। उदाहरण के लिए poly house या hybrid structure के लिए अलग क्षेत्र के हिसाब से cost norms निर्धारित हैं और सामान्य सहायता 50 प्रतिशत तक है। अधिकतम सहायता क्षेत्र भी कई components के लिए तय किया गया है।
इसलिए किसान को बाजार में किसी कंपनी द्वारा बताई गई पॉलीहाउस की कीमत को सीधे सब्सिडी की गणना का आधार नहीं मानना चाहिए। सरकार अपनी निर्धारित eligible cost के आधार पर सहायता की गणना करती है।
छोटे और बड़े पॉलीहाउस में क्या अंतर है
यदि किसान छोटे क्षेत्र में पॉलीहाउस बनाना चाहता है तो उसके लिए राज्य के बागवानी विभाग के माध्यम से MIDH के protected cultivation component के तहत सहायता उपलब्ध हो सकती है। दूसरी तरफ बड़े commercial project के लिए NHB की project-mode व्यवस्था अलग हो सकती है।
2025 की गाइडलाइन में कई protected cultivation components के लिए अधिकतम क्षेत्र और सहायता सीमा अलग-अलग रखी गई है। उदाहरण के लिए polyhouse में कुछ planting material और cultivation components पर 50 प्रतिशत सहायता अधिकतम 2,500 वर्ग मीटर प्रति beneficiary तक दी जा सकती है।
यही वजह है कि किसान को केवल “50 प्रतिशत सब्सिडी” देखकर प्रोजेक्ट शुरू नहीं करना चाहिए। पहले यह पता करना जरूरी है कि उसके प्रोजेक्ट का कौन सा हिस्सा subsidy के लिए eligible है।
किन चीजों पर सरकारी सहायता मिल सकती है
पॉलीहाउस प्रोजेक्ट में केवल लोहे का ढांचा और प्लास्टिक शीट ही महत्वपूर्ण नहीं होती। संरक्षित खेती में सिंचाई, खेती की तकनीक और कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी जरूरी हो सकती हैं।
2025 की MIDH गाइडलाइन में protected cultivation के साथ कुछ add-on components को भी शामिल किया गया है। इनमें hydroponics और aeroponics, circulation fans तथा sensor-based automation जैसे विकल्प शामिल हैं।
लेकिन हर सुविधा पर एक जैसी सीमा नहीं है। उदाहरण के लिए hydroponics और aeroponics के लिए 50 प्रतिशत सहायता अधिकतम 1,000 वर्ग मीटर क्षेत्र तक दी जा सकती है, जबकि कुछ अन्य components की अपनी अलग सीमा है।
इसलिए प्रोजेक्ट बनाते समय प्रत्येक component को अलग से जांचना जरूरी है।
₹1 करोड़ की सब्सिडी पाने के लिए कौन पात्र हो सकता है
NHB की योजना में केवल व्यक्तिगत किसान ही एकमात्र संभावित आवेदक नहीं हैं। योजना के नियमों में अलग-अलग प्रकार के संगठन और उद्यम भी शामिल हो सकते हैं, हालांकि प्रत्येक योजना और component की अपनी पात्रता शर्तें होती हैं।
किसान, farmer groups, FPO, partnership या proprietary firms और कुछ अन्य eligible organizations को लागू योजना के अनुसार सहायता मिल सकती है। NHB की योजना में एक ही project के लिए दूसरी केंद्रीय योजना से दोहरा लाभ लेने पर भी रोक हो सकती है।
आवेदक को जमीन, प्रोजेक्ट, वित्तीय क्षमता, बैंक ऋण, तकनीकी डिजाइन और फसल योजना से जुड़े दस्तावेज भी नियमों के अनुसार तैयार रखने पड़ सकते हैं।
सब्सिडी लेने की पूरी प्रक्रिया
पॉलीहाउस के लिए सब्सिडी लेने में सबसे जरूरी बात यह है कि किसान पहले प्रोजेक्ट की योजना बनाए और उसके बाद आवेदन की प्रक्रिया शुरू करे। बिना मंजूरी के निर्माण शुरू कर देना कई मामलों में परेशानी पैदा कर सकता है।
सामान्य प्रक्रिया को आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं:
- सबसे पहले अपनी जमीन, क्षेत्रफल और उगाई जाने वाली फसल के आधार पर पॉलीहाउस प्रोजेक्ट तैयार करें।
- लागू MIDH या NHB योजना के अनुसार Detailed Project Report यानी DPR तैयार करें।
- जरूरत के अनुसार बैंक से term loan या project finance की व्यवस्था करें।
- संबंधित सरकारी विभाग या NHB की लागू आवेदन प्रक्रिया के अनुसार आवेदन जमा करें।
- विभाग या अधिकृत एजेंसी द्वारा प्रोजेक्ट की जांच, निरीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने दें।
इसके बाद स्वीकृत नियमों के अनुसार प्रोजेक्ट बनाया जाता है और निरीक्षण तथा जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होने पर subsidy जारी की जा सकती है। NHB की सहायता credit-linked और back-ended होने के कारण इसे सामान्य नकद अनुदान की तरह पहले ही हाथ में मिलने वाली राशि नहीं समझना चाहिए।
DPR में क्या-क्या जानकारी देनी पड़ सकती है
बड़े पॉलीहाउस प्रोजेक्ट के लिए Detailed Project Report बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसमें केवल यह लिखना पर्याप्त नहीं होता कि किसान पॉलीहाउस बनाना चाहता है।
DPR में जमीन, प्रस्तावित संरचना, फसल, उत्पादन योजना, पानी की व्यवस्था, सिंचाई और fertigation system, अनुमानित लागत, बाजार, आय और खर्च जैसी जानकारी शामिल की जा सकती है।
बैंक और संबंधित विभाग इसी तरह की जानकारी के आधार पर प्रोजेक्ट की व्यवहारिकता समझते हैं। इसलिए DPR में बढ़ा-चढ़ाकर उत्पादन या मुनाफा दिखाने के बजाय वास्तविक आंकड़ों और स्थानीय बाजार की स्थिति के आधार पर योजना बनाना बेहतर है।
किसान को कितनी अपनी रकम लगानी होगी
अगर किसी प्रोजेक्ट पर 50 प्रतिशत subsidy लागू होती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसान को बाकी 50 प्रतिशत पैसा हमेशा अपनी जेब से ही देना होगा। बड़े project में बैंक finance की भूमिका हो सकती है, लेकिन loan की मंजूरी बैंक के नियमों और project assessment पर निर्भर करती है।
उदाहरण के लिए यदि किसी योग्य प्रोजेक्ट की स्वीकृत लागत ₹2 करोड़ है और पूरी लागत subsidy के लिए eligible मानी जाती है, तो 50 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम ₹1 करोड़ की सहायता की गणना हो सकती है। बाकी राशि किसान की margin money और बैंक finance के मिश्रण से पूरी हो सकती है।
लेकिन यह केवल समझने के लिए उदाहरण है। वास्तविक subsidy project के eligible cost, approved components और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
पॉलीहाउस बनाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें
पॉलीहाउस को केवल subsidy वाला काम समझकर शुरू करना सही नहीं है। इसमें निर्माण के बाद लगातार खेती का खर्च भी आता है।
- जमीन का चुनाव पानी और सड़क की सुविधा देखकर करें।
- पहले से तय करें कि तैयार फसल किस बाजार में बेचेंगे।
- स्थानीय मौसम के हिसाब से पॉलीहाउस का design और crop plan चुनें।
- निर्माण कंपनी और सामग्री की गुणवत्ता की जांच करें।
इसके अलावा बिजली, पानी, मजदूरी, बीज या पौधे, खाद, कीट नियंत्रण, मरम्मत और बाजार तक माल पहुंचाने का खर्च भी पहले से जोड़ना चाहिए। सब्सिडी मिलने के बाद भी खेती अपने आप लाभदायक नहीं हो जाती।
कौन सी फसल पॉलीहाउस में लगाई जा सकती है
Protected cultivation में कई प्रकार की सब्जियों और फूलों की खेती की जा सकती है। कौन सी फसल आपके लिए सही रहेगी, यह आपके क्षेत्र के मौसम, बाजार और उपलब्ध तकनीक पर निर्भर करेगा।
MIDH की गाइडलाइन में polyhouse के तहत कई high-value horticulture crops और फूलों से जुड़े components के लिए सहायता के प्रावधान हैं। उदाहरण के तौर पर Gerbera, Carnation, Rose, Chrysanthemum और Lilium जैसी फूलों की खेती के लिए अलग cost norms दिए गए हैं।
सब्जियों में भी protected cultivation का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन किसान को फसल चुनने से पहले अपने जिले के बाजार में मांग और कीमत की स्थिति जरूर देखनी चाहिए।
आवेदन कहां करें
किसान को सबसे पहले अपने राज्य के बागवानी विभाग से वर्तमान implementation guidelines और आवेदन की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। क्योंकि केंद्र की योजना के साथ राज्य स्तर पर आवेदन प्रक्रिया, लक्ष्य, समय और कुछ अतिरिक्त शर्तें अलग हो सकती हैं।
बड़े NHB project के लिए National Horticulture Board की लागू योजना और online application व्यवस्था देखना जरूरी है। NHB अपनी schemes और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराता है।
आधिकारिक जानकारी के लिए National Horticulture Board की वेबसाइट और MIDH की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
₹1 करोड़ की सब्सिडी को लेकर सबसे जरूरी बात
₹1 करोड़ तक की subsidy का प्रावधान वास्तविक है, लेकिन इसे हर किसान के लिए तय ₹1 करोड़ की सरकारी सहायता समझना गलत होगा। यह बड़े commercial horticulture protected cultivation projects के लिए अधिकतम सीमा से जुड़ा प्रावधान है।
2025 की संशोधित गाइडलाइन के अनुसार protected cultivation project mode में eligible project cost पर 50 प्रतिशत तक credit-linked subsidy और अधिकतम ₹100 लाख प्रति project की सीमा दी गई है। सामान्य क्षेत्र में project के लिए 2,500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र की शर्त भी लागू है।
छोटे पॉलीहाउस के लिए अलग MIDH components और उनकी अपनी cost तथा area limits लागू हो सकती हैं। इसलिए किसान को अपने जिले और राज्य में लागू नियम देखकर ही subsidy की सही गणना करनी चाहिए।
2026 में पॉलीहाउस खेती शुरू करने वाले किसानों के लिए सरकारी सहायता एक महत्वपूर्ण मौका हो सकती है, लेकिन ₹1 करोड़ की subsidy को लेकर सबसे पहले सही जानकारी समझना जरूरी है। सरकार eligible commercial protected cultivation projects को 50 प्रतिशत तक सहायता दे सकती है और NHB project-mode व्यवस्था में अधिकतम subsidy ₹1 करोड़ तक पहुंच सकती है।
फिर भी subsidy पाने के लिए केवल पॉलीहाउस बनाना पर्याप्त नहीं है। जमीन, project size, eligible components, DPR, बैंक finance, सरकारी मंजूरी, निरीक्षण और खेती की योजना सभी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए किसान को पहले अपने राज्य के बागवानी विभाग और लागू NHB या MIDH नियमों के अनुसार project तैयार करना चाहिए। सही योजना के साथ पॉलीहाउस खेती में सरकारी सहायता का लाभ लिया जा सकता है, लेकिन किसी भी एजेंट या कंपनी के इस दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए कि हर किसान को बिना शर्त ₹1 करोड़ की subsidy मिल जाएगी।




