धान में सभी खरपतवार खत्म, किसान तुरंत करें ये काम : Paddy Weed Control

Paddy Weed Control

धान की फसल में खरपतवार समय पर नहीं रोके गए तो वे फसल का पानी, खाद और पोषण तेजी से खींच लेते हैं। इसका सीधा असर पौधों की बढ़वार और पैदावार पर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई या बुवाई के बाद शुरुआती 30 से 40 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी समय सही कदम उठाने से फसल को बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सकता है।

धान में खरपतवार क्यों बनते हैं बड़ी समस्या?

खरपतवार धान के पौधों के साथ ही उगते हैं। ये मिट्टी से पोषक तत्व, नमी और धूप का उपयोग करते हैं। इससे धान के पौधे कमजोर रह जाते हैं और उनमें कम फुटाव होता है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो बाद में दवा का असर भी कम हो सकता है और उत्पादन घट सकता है। इसलिए खेत का नियमित निरीक्षण करना जरूरी है।

खेत में कौन-कौन से खरपतवार मिलते हैं?

धान के खेत में आमतौर पर तीन तरह के खरपतवार पाए जाते हैं। सही पहचान होने पर ही सही नियंत्रण का तरीका चुना जा सकता है।

खरपतवार का प्रकारसामान्य उदाहरण
घास वाले खरपतवारसांवा, Echinochloa प्रजातियां
मोथा वर्गCyperus प्रजातियां
चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारMonochoria, Ludwigia, Eclipta आदि

यदि खेत में तीनों प्रकार के खरपतवार मौजूद हैं, तो एक ही दवा हर स्थिति में सही नहीं होती। दवा का चुनाव खेत की स्थिति और खरपतवार के प्रकार के अनुसार करना चाहिए।

किसान अभी क्या करें?

यदि खरपतवार अभी छोटे हैं, तो यही नियंत्रण का सबसे अच्छा समय है। खेत में पर्याप्त नमी होने पर अनुशंसित खरपतवारनाशी का उपयोग बेहतर परिणाम देता है। वहीं यदि खरपतवार बड़े हो चुके हैं, तो आवश्यकता के अनुसार हाथ से निराई या यांत्रिक निराई भी करनी चाहिए।

  • खेत का निरीक्षण करके पहले खरपतवार की पहचान करें।
  • दवा केवल अनुशंसित मात्रा और सही समय पर ही डालें।
  • छिड़काव के समय खेत में आवश्यक नमी बनी रहनी चाहिए।
  • दवा का चुनाव फसल की अवस्था और खरपतवार के प्रकार के अनुसार करें।

दवा का उपयोग करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

खरपतवारनाशी का गलत उपयोग फसल को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए किसी भी दवा का प्रयोग उसके लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही करें। यदि खेत में मिश्रित प्रकार के खरपतवार हैं या स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो स्थानीय कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना बेहतर रहेगा। जरूरत पड़ने पर किसान अपने जिले के कृषि विभाग से भी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विभाग की जानकारी के लिए https://agricoop.gov.in/ का उपयोग किया जा सकता है।

अच्छी पैदावार के लिए ये बातें भी जरूरी हैं

खरपतवार नियंत्रण तभी सबसे अधिक सफल होता है जब खेत का पानी, खाद और फसल प्रबंधन भी सही हो। नियमित निगरानी करने से दोबारा उगने वाले खरपतवारों पर भी समय रहते नियंत्रण किया जा सकता है।

  • खेत में लंबे समय तक जलभराव या पूरी तरह सूखने की स्थिति न बनने दें।
  • समय पर खाद और उर्वरक दें ताकि धान की बढ़वार अच्छी रहे।
  • दवा मिलाते समय सुरक्षा संबंधी सभी सावधानियां अपनाएं।
  • जरूरत पड़ने पर दूसरी निराई समय पर करें।

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण का सही समय शुरुआती वृद्धि अवधि होती है। यदि किसान इसी समय खेत का निरीक्षण करके सही तरीके से खरपतवार का नियंत्रण कर लेते हैं, तो फसल को पर्याप्त पोषण मिलता है और अच्छी पैदावार की संभावना बढ़ जाती है। किसी भी खरपतवारनाशी का उपयोग हमेशा अनुशंसित मात्रा, सही समय और लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही करें। इससे फसल सुरक्षित रहेगी और बेहतर परिणाम मिलेंगे।

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