धान की बुवाई में हुई देरी तो करें इस फसल की खेती, 70-80 दिन में होगी तैयार

धान की बुवाई में हुई देरी तो करें इस फसल की खेती, 70-80 दिन में होगी तैयार

धान की बुवाई में देरी हो गई है और किसान अब कम समय में तैयार होने वाली फसल की तलाश कर रहे हैं, तो उड़द एक विकल्प हो सकती है। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के अनुसार, कम अवधि में पकने वाली उड़द की कुछ किस्में 70-80 दिन में तैयार हो जाती हैं।

लेकिन यहां समय का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। उत्तर भारत में खरीफ उड़द की सामान्य बुवाई जुलाई के पहले सप्ताह तक बेहतर मानी जाती है। बारिश देर से आने की स्थिति में जुलाई के अंत तक बुवाई की जा सकती है, जबकि इसके बाद बुवाई करने पर उत्पादन घट सकता है।

धान में देरी होने पर उड़द क्यों हो सकती है विकल्प

धान की फसल लंबी अवधि ले सकती है। अगर इसकी बुवाई या रोपाई में ज्यादा देर हो जाए तो आगे आने वाली रबी फसल की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कम समय में तैयार होने वाली दलहनी फसल किसान के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है।

उड़द को अलग फसल के रूप में भी उगाया जाता है और कई जगह दूसरी फसलों के साथ मिलाकर भी इसकी खेती की जाती है। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के अनुसार, कम अवधि में पकने वाली उड़द की किस्मों का इस्तेमाल अलग-अलग फसल प्रणालियों में किया जाता है।

70-80 दिन में तैयार होने वाली उड़द

उड़द की सभी किस्में एक ही समय में तैयार नहीं होतीं। किस्म और मौसम के अनुसार फसल की अवधि अलग हो सकती है। संस्थान के अनुसार, कुछ कम अवधि वाली किस्में 70-80 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं।

इसलिए किसान को केवल फसल के नाम पर बीज नहीं खरीदना चाहिए। बुवाई से पहले अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त और कम अवधि में तैयार होने वाली किस्म के बारे में कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

बुवाई का सही समय समझना जरूरी

उत्तर भारत में खरीफ उड़द की बुवाई का सामान्य उपयुक्त समय जुलाई का पहला सप्ताह बताया गया है। अगर बारिश देर से आती है तो जुलाई के अंत तक इसकी बुवाई की जा सकती है। इसके बाद बुवाई करने पर उत्पादन कम होने की संभावना रहती है।

बातउड़द की सामान्य सलाह
खरीफ बुवाई का बेहतर समयजुलाई का पहला सप्ताह
बारिश देर से आने परजुलाई के अंत तक बुवाई की जा सकती है
पकने की अवधिकुछ कम अवधि वाली किस्में 70-80 दिन
कतार की दूरीकरीब 30 सेंटीमीटर
बीज की गहराईकरीब 4-5 सेंटीमीटर
खरीफ बीज दरकरीब 12-15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

खेत और बुवाई की तैयारी कैसे करें

उड़द की खरीफ फसल के लिए ऐसी जमीन बेहतर रहती है जहां पानी आसानी से निकल सके। खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को नुकसान हो सकता है। इसलिए भारी बारिश वाले इलाके में जल निकासी का ध्यान पहले से रखना जरूरी है।

बुवाई मेड़ पर या सीड ड्रिल से कतारों में की जा सकती है। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के अनुसार बीज को करीब 4-5 सेंटीमीटर गहराई पर बोना और कतारों के बीच लगभग 30 सेंटीमीटर दूरी रखना उपयुक्त है। पौधों के बीच करीब 8-10 सेंटीमीटर दूरी रखी जा सकती है।

देर से बुवाई में इन बातों का रखें ध्यान

देर से बुवाई का मतलब यह नहीं है कि किसान किसी भी समय उड़द बो सकता है। खरीफ में बहुत ज्यादा देर करने पर फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इसलिए अगर बुवाई का समय निकल रहा है तो स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति देखकर फैसला लेना जरूरी है।

  • कम अवधि में पकने वाली और अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त किस्म चुनें
  • खेत में पानी जमा न होने दें और जल निकासी की व्यवस्था रखें
  • बीज को उचित गहराई और सही दूरी पर बोएं
  • देर से बुवाई की स्थिति में स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें

खाद और बीज की तैयारी पर भी दें ध्यान

उड़द दलहनी फसल है और इसके पोषण प्रबंधन में संतुलन जरूरी है। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान की जानकारी के अनुसार खरीफ उड़द के लिए बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और गंधक की अनुशंसित मात्रा देने की सलाह है। मिट्टी की जांच के आधार पर खाद की मात्रा तय करना ज्यादा सही तरीका है।

बीज की गुणवत्ता भी अच्छी फसल के लिए महत्वपूर्ण है। किसान को साफ और अच्छी गुणवत्ता वाला बीज लेना चाहिए। बीज उपचार के लिए अपने क्षेत्र में लागू कृषि सलाह का पालन करना चाहिए और बिना जानकारी के किसी रसायन की मात्रा तय करके इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

पानी और खरपतवार पर नजर रखें

उड़द की फसल को खेत में जरूरत के अनुसार नमी चाहिए, लेकिन पानी का जमाव नुकसान कर सकता है। बारिश के मौसम में कई बार खेत में जरूरत से ज्यादा पानी आ जाता है। ऐसी स्थिति में पानी की निकासी जल्दी करना जरूरी है।

शुरुआती अवस्था में खरपतवार भी उड़द की बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए खेत की नियमित निगरानी करें और खरपतवार नियंत्रण के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तरीका अपनाएं।

रोग और कीट की निगरानी भी जरूरी

उड़द में कई तरह के रोग और कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनमें पीला चितेरी रोग भी महत्वपूर्ण है। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के अनुसार इस रोग को फैलाने में सफेद मक्खी की भूमिका होती है।

अगर खेत में पत्तियों पर असामान्य पीले निशान दिखाई दें या पौधों की बढ़वार प्रभावित हो तो किसान को तुरंत फसल की जांच करनी चाहिए। केवल लक्षण देखकर मनमाने तरीके से कीटनाशक या रोग की दवा का छिड़काव करने के बजाय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

धान और उड़द को लेकर किसान क्या समझें

धान की बुवाई में थोड़ी देरी होने पर किसान के पास स्थिति के अनुसार अलग विकल्प हो सकते हैं। अगर धान की खेती करना अभी भी क्षेत्र और मौसम के हिसाब से संभव है, तो कृषि विभाग या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयुक्त कम अवधि वाली धान की किस्म चुनना भी एक रास्ता हो सकता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की हाल की कृषि सलाह में भी देर से धान लगाने की स्थिति में कम अवधि वाली किस्मों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है, ताकि आगे की रबी फसलों की बुवाई में ज्यादा देरी न हो। इसलिए केवल एक फसल का फैसला लेने के बजाय पूरे फसल चक्र को ध्यान में रखना जरूरी है।

किसान के लिए सबसे जरूरी बात

अगर धान की बुवाई में देरी हुई है और किसान उड़द का विकल्प देख रहा है, तो सबसे पहले यह देखना चाहिए कि अभी उसके क्षेत्र में उड़द की बुवाई का समय बचा है या नहीं। जुलाई के अंत के बाद खरीफ उड़द की बुवाई करने पर उत्पादन घट सकता है।

70-80 दिन में तैयार होने वाली कम अवधि की उड़द की किस्में समय बचाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन फसल की वास्तविक अवधि मौसम, किस्म और खेती की स्थिति पर निर्भर करेगी। इसलिए केवल कम दिनों में तैयार होने के दावे को देखकर बीज खरीदना सही नहीं है।

धान की बुवाई में देरी होने पर कम अवधि वाली उड़द किसानों के लिए एक विकल्प हो सकती है। कुछ किस्में करीब 70-80 दिन में तैयार हो जाती हैं और उड़द को कई फसल प्रणालियों में शामिल किया जाता है।

फिर भी बुवाई की तारीख सबसे अहम है। उत्तर भारत में जुलाई के अंत तक देर से खरीफ उड़द की बुवाई की जा सकती है, लेकिन इसके बाद उत्पादन कम होने का खतरा रहता है। इसलिए किसान अपने क्षेत्र की बारिश, मिट्टी और उपलब्ध समय को देखकर फैसला लें और सही किस्म तथा खेती की मात्रा के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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