धान की फसल में अगर पौधे सामान्य बढ़ने के बजाय छोटे रह जाएं तो किसान इसे केवल खाद या पानी की कमी समझकर नजरअंदाज न करें। कुछ मामलों में पौधों का बौना रहना वायरस से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। खास तौर पर Southern Rice Black-Streaked Dwarf Virus यानी SRBSDV धान में गंभीर बौनापन पैदा कर सकता है।
इस बीमारी में पौधे की बढ़वार रुक सकती है और सामान्य पौधों की तुलना में प्रभावित पौधे काफी छोटे दिखाई दे सकते हैं। समय रहते खेत की जांच और बीमारी फैलाने वाले कीट की निगरानी करना बचाव के लिए जरूरी है।
धान के पौधे छोटे क्यों रह जाते हैं
धान में पौधों की कम बढ़वार के कई कारण हो सकते हैं। पोषक तत्वों की कमी, पानी की समस्या, जड़ से जुड़ी परेशानी, कीट और रोग सभी इसके कारण बन सकते हैं। इसलिए केवल पौधे की ऊंचाई देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि फसल में वायरस ही है।
लेकिन अगर खेत में कई पौधे एक साथ असामान्य रूप से छोटे रह रहे हैं और उनमें ज्यादा कल्ले निकल रहे हैं, पत्तियां गहरे हरे रंग की दिख रही हैं या फसल की बढ़वार रुक गई है, तो वायरस से जुड़ी बीमारी की जांच जरूरी हो जाती है। SRBSDV के मामले में ऐसे लक्षण देखे
बौने वायरस में कौन से लक्षण दिख सकते हैं
Southern Rice Black-Streaked Dwarf Virus से प्रभावित धान में सबसे प्रमुख लक्षण पौधे का बौना रहना है। प्रभावित पौधों में सामान्य से अधिक कल्ले निकल सकते हैं और पत्तियां गहरे हरे रंग की हो सकती हैं। बीमारी की स्थिति में फसल की बढ़वार पर काफी असर पड़ सकता है।
धान में दूसरे वायरस भी बौनापन पैदा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए टुंग्रो रोग में पौधे छोटे रह जाते हैं, कल्ले कम निकलते हैं और पत्तियों का रंग पीला या नारंगी-पीला हो सकता है। इसलिए सही रोग की पहचान के लिए खेत की स्थिति और लक्षणों को साथ देखकर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
वायरस फैलाने वाला कीट भी पहचानें
SRBSDV को फैलाने में व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर यानी सफेद पीठ वाला फुदका महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार यह कीट संक्रमित पौधे से वायरस लेकर स्वस्थ पौधों तक पहुंचा सकता है। यह वायरस बीज से फैलने वाला नहीं माना जाता।
किसानों को खेत में इस कीट की नियमित निगरानी करनी चाहिए। इसके लिए कुछ पौधों को हल्का झुकाकर उनके निचले हिस्से को दो-तीन बार थपथपाया जा सकता है। अगर पौधे में व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर मौजूद हैं तो वे पानी की सतह पर तैरते हुए दिखाई दे सकते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की सलाह में भी इसी तरह नियमित निगरानी करने को कहा गया है।
किसान अभी क्या सावधानी रखें
सबसे जरूरी काम बीमारी के लक्षणों और कीट की मौजूदगी पर लगातार नजर रखना है। शुरुआती अवस्था में असामान्य पौधों की पहचान हो जाए तो बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए समय पर कदम उठाए जा सकते हैं।
- खेत की मेड़ और आसपास के हिस्से को खरपतवार से साफ रखें
- धान के खेत और नर्सरी में व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर की नियमित जांच करें
- बहुत ज्यादा नाइट्रोजन खाद देने से बचें और फसल की जरूरत के अनुसार खाद दें
- शुरुआती अवस्था में संक्रमित पौधे दिखें तो कृषि विशेषज्ञ से उनकी सही पहचान कराएं
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने बौनी बढ़वार वाले धान में शुरुआती संक्रमित पौधों की पहचान करके उन्हें निकालने की सलाह दी है। अगर संक्रमण सीमित स्तर पर हो तो प्रभावित कल्लों को हटाकर स्वस्थ कल्लों से बदलने की सलाह भी दी गई है।
कीट दिखाई दे तो क्या करें
सिर्फ पौधे छोटे दिखने के आधार पर सीधे कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। पहले यह देखना जरूरी है कि खेत में वायरस फैलाने वाला कीट मौजूद है या नहीं। बीमारी और कीट की सही पहचान के बाद ही स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह के अनुसार नियंत्रण का तरीका चुनना बेहतर है।
ICAR की सलाह में व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर मिलने पर कुछ स्वीकृत कीटनाशकों के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है और छिड़काव को पौधे के निचले हिस्से की ओर करने की सलाह दी गई है। दवा का चुनाव, मात्रा और इस्तेमाल का तरीका फसल की स्थिति तथा उस समय लागू स्थानीय सिफारिश के अनुसार ही होना
नर्सरी से ही निगरानी शुरू करना बेहतर
धान में वायरस फैलाने वाले कीट की निगरानी केवल मुख्य खेत में रोपाई के बाद शुरू नहीं करनी चाहिए। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने नर्सरी अवस्था से ही धान की फसल और व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर पर नजर रखने की सलाह दी है। नर्सरी और आसपास के खेतों को खरपतवार से मुक्त रखने तथा फसल की स्वस्थ बढ़वार बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
अगर नर्सरी में ही असामान्य रूप से छोटे पौधे दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें स्वस्थ पौधों से अलग करके जांच कराना बेहतर है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से समस्या को खेत में पहचानना बाद में मुश्किल हो सकता है।
हर छोटे पौधे को वायरस न मानें
यह बात किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि धान का पौधा छोटा रहना अपने आप में वायरस की पक्की पहचान नहीं है। खेत में पानी की स्थिति, खाद की कमी, जड़ की समस्या और दूसरे रोग भी पौधे की बढ़वार रोक सकते हैं।
इसलिए अगर पौधों की ऊंचाई कम है तो पहले खेत की पूरी स्थिति देखें। पौधों के रंग, कल्लों की संख्या, पत्तियों की हालत और कीटों की मौजूदगी पर ध्यान दें। जरूरत पड़ने पर मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।
समय पर पहचान से नुकसान कम करने में मदद
धान में वायरस से जुड़ी बीमारी का सबसे अच्छा तरीका शुरुआती निगरानी है। किसान अगर नियमित रूप से खेत और नर्सरी देखते रहें तो असामान्य पौधों और बीमारी फैलाने वाले कीट की पहचान जल्दी हो सकती है।
बौने पौधे दिखाई देने पर घबराने के बजाय पहले सही कारण पता करना चाहिए। अगर व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर या वायरस जैसे लक्षण मिलते हैं तो तुरंत कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना सुरक्षित तरीका है।
धान के पौधों का अचानक छोटा रह जाना किसान के लिए चेतावनी का संकेत हो सकता है। खासकर जब इसके साथ ज्यादा कल्ले निकलना, गहरे हरे पत्ते या खेत में व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर दिखाई दे, तब वायरस से जुड़ी समस्या की जांच जरूरी हो जाती है।
किसानों को नियमित निगरानी, खेत की सफाई और संतुलित खाद प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। सबसे अहम बात यह है कि केवल पौधे की ऊंचाई देखकर दवा का छिड़काव न करें। पहले बीमारी और कीट की सही पहचान कराएं और फिर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपचार या नियंत्रण का कदम उठाएं।



